सपनों को उड़ान देने वाला मंच बना एवरग्रीन — आकांक्षा शर्मा मिसेज छत्तीसगढ़ 2026

महिलाओं की ई-पत्रिका पत्रिका एवरग्रीनलेडी द्वारा तीसरे वर्ष आयोजित एवरग्रीन मिसेज छत्तीसगढ़ प्रतियोगिता में विनर बनीं 38 वर्षीय आकांक्षा शर्मा उन्होंने कहा कि “एक महिला की सफलता तभी सार्थक है, जब वह अपने साथ अनेक अन्य महिलाओं के जीवन में भी नई उम्मीद जगा सके।” इसी सोच को अपने जीवन का लक्ष्य मानने वाली आकांक्षा शर्मा आज उन महिलाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभर रही हैं, जो परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को कहीं पीछे छोड़ देती हैं। आकांक्षा शर्मा वर्तमान में रवीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय (पूर्व में एआईएसईसीटी विश्वविद्यालय) में कुलसचिव (Registrar) की निजी सहायक (PA) के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने बी.एससी., पीजीडीसीए और एम.ओ.एम. की शिक्षा प्राप्त की है तथा वर्तमान में एल.एल.बी. की पढ़ाई भी कर रही हैं। पेशेवर जीवन के साथ-साथ उन्होंने स्वयं के व्यक्तित्व को निखारने और समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने का संकल्प भी लिया है।

आकांक्षा शर्मा बताती हैं कि इस प्रतियोगिता में भाग लेने का निर्णय उनके लिए केवल एक मंच तक पहुँचने का प्रयास नहीं था, बल्कि स्वयं को पहचानने और अपनी क्षमताओं को नई दिशा देने की शुरुआत थी। इस यात्रा में उन्हें सबसे बड़ी प्रेरणा अपने परिवार, विशेष रूप से अपने बच्चों से मिली। उनका कहना है कि परिवार का विश्वास और सहयोग ही किसी भी महिला की सबसे बड़ी शक्ति होता है। उन्होंने कहा कि उनका जीवन केवल व्यक्तिगत उपलब्धियाँ हासिल करने तक सीमित नहीं है। वे ऐसा समाज देखना चाहती हैं, जहाँ कोई भी लड़की या महिला अपने सपनों को पूरा करने के लिए किसी की अनुमति की मोहताज न हो। उनका सपना है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं के लिए ऐसा मंच तैयार किया जाए, जहाँ वे अपनी प्रतिभा को पहचान सकें, आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।

प्रतियोगिता के अनुभव साझा करते हुए आकांक्षा शर्मा ने बताया कि पूरे आयोजन के दौरान उन्हें हर दिन कुछ नया सीखने का अवसर मिला। इस मंच ने उनके व्यक्तित्व में सकारात्मक बदलाव लाया, आत्मविश्वास बढ़ाया और सार्वजनिक मंच पर स्वयं को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की कला सिखाई। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता ने उन्हें यह विश्वास दिलाया कि यदि इच्छाशक्ति मजबूत हो तो उम्र, परिस्थितियाँ और जिम्मेदारियाँ कभी भी सफलता के रास्ते में बाधा नहीं बन सकतीं। उन्होंने विशेष रूप से ट्रेडिशनल (Traditional) राउंड को अपनी सबसे यादगार प्रस्तुति बताया। उनके अनुसार जब उन्होंने छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वेशभूषा और आभूषण धारण कर मंच पर प्रस्तुति दी, तब उन्हें अपनी संस्कृति, परंपरा और विरासत पर गर्व का अनुभव हुआ। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति की सादगी, गरिमा और शालीनता को मंच पर प्रस्तुत करना उनके जीवन के सबसे भावनात्मक क्षणों में से एक रहेगा। आकांक्षा शर्मा का कहना है कि प्रतियोगिता में उन्हें कोई नकारात्मक अनुभव नहीं हुआ। यदि कोई चुनौती थी, तो वह केवल अपने कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकलना था। लेकिन इसी चुनौती ने उन्हें मानसिक रूप से और अधिक मजबूत बनाया तथा जीवन में नए अवसरों को स्वीकार करने का साहस दिया।उन्होंने भविष्य में शॉर्ट फिल्मों और विज्ञापन मॉडलिंग में कार्य करने की इच्छा भी व्यक्त की। उनका मानना है कि यदि किसी मंच के माध्यम से समाज में सकारात्मक संदेश पहुँचाया जा सके, महिलाओं को प्रेरित किया जा सके और उनकी प्रतिभा को सामने लाया जा सके, तो वे ऐसे हर अवसर का स्वागत करेंगी।

प्रतियोगिता की मार्गदर्शक डॉ. शीला शर्मा के प्रति अपनी भावनाएँ व्यक्त करते हुए आकांक्षा शर्मा ने कहा कि जीवन में कुछ लोग केवल शिक्षक नहीं होते, बल्कि व्यक्तित्व को गढ़ने वाले शिल्पकार होते हैं। उन्होंने भावुक शब्दों में कहा, “कोयले की खान से हीरा तो मिल जाता है, लेकिन जब तक कोई जौहरी उसे तराशता नहीं, उसकी असली चमक दुनिया के सामने नहीं आती। शीला मैम वही जौहरी हैं, जिन्होंने हमारी कमियों को हमारी ताकत बनाया और हमें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना सिखाया। यदि उनका मार्गदर्शन न मिला होता, तो यह यात्रा शायद इतनी सफल और यादगार नहीं बन पाती।”एवरग्रीन परिवार की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह प्रतियोगिता केवल ताज जीतने का मंच नहीं थी, बल्कि एक ऐसा परिवार था जहाँ हर प्रतिभागी को सम्मान, सहयोग और आत्मीयता मिली। जब भी कोई प्रतिभागी थका या निराश हुआ, टीम के किसी न किसी सदस्य ने उसे संभाला, प्रोत्साहित किया और आगे बढ़ने का हौसला दिया। यही पारिवारिक वातावरण इस आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता रहा।

उन्होंने आयोजन समिति को बधाई देते हुए कहा कि इतनी भव्य, अनुशासित और निष्पक्ष प्रतियोगिता का सफल आयोजन अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। एवरग्रीन परिवार ने प्रतिभागियों को केवल मंच ही नहीं दिया, बल्कि उनके सपनों को नई उड़ान, नई पहचान और भविष्य की नई संभावनाएँ भी प्रदान कीं।आकांक्षा शर्मा ने विश्वास व्यक्त किया कि वे भविष्य में भी एवरग्रीन परिवार का हिस्सा बनी रहेंगी तथा राष्ट्रीय स्तर की मिसेज इंडिया जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में भी भाग लेकर अपने राज्य और देश का नाम रोशन करने का प्रयास करेंगी।

अंत में उन्होंने सभी महिलाओं के लिए संदेश देते हुए कहा कि सपनों की कोई उम्र नहीं होती। यदि आत्मविश्वास, मेहनत और परिवार का सहयोग साथ हो तो हर महिला अपने जीवन की नई कहानी स्वयं लिख सकती है। महिलाओं को चाहिए कि वे अपनी प्रतिभा पर विश्वास करें, अवसरों का स्वागत करें और जीवन की हर चुनौती को सफलता की सीढ़ी बनाकर आगे बढ़ें।

Check Also

एवरग्रीन मिसेज छत्‍तीसगढ़ प्रतियोगिता बिलासपुर में सम्‍पन्‍न।

एवरग्रीनलेडी पत्रिका के द्वारा आयोजित मिसेज, मिस, मिस्‍टर छत्‍तीसगढ़ प्रतियोगिता का आयोजन बिलासपुर के 36 …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *